Sunday, 19 July 2020

साईकिल गर्ल ज्योति

सुना था बेटी सर की भार होती हैं
पराई घर की हार होती है
गरीब मा बाप के आंसू की धार होती
क्या पढ़ा लिखा कर फायदा
ये तो केवले दहेज रूपी सार होती है

पर मेरा यह भर्म को टूट गया
इतिहास के पन्नों में एक और अध्याय जुट गया
आवश्यकता है अब हमे भी 
उनके प्रति नज़रिया बदलने की
बेटी भी बेटा जैसा ही होती है
उनके लिए मन में समभाव रखने की

यह बेटी ही है जो हजारों किलोमीटर चल कर 
अपने बाप का सहारा बनी
इस भुखमरी के वक्त में 
अपनो के लिए डूबते नदी में किनारा बनी
जिसे सारा दुनिया कहता है अबला नारी
वह अबला नारी सभी के लिए
साहस की पिटारा बनी

जिसके साहस को देशं ने ही नहीं
बल्कि दुनिया ने माना
इस मिटी के कोख में है 
न जाने कैसी कैसी कैसीे वीरांगनाएं है
को सही माना

मै भी उसके जज़्बे हौसले को सलाम करता हूं
अपनी एक छोटी सी रचना 
भारत की बेटी  ज्योति के नाम करता हूंl

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